पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बारे में सूचना

इसके संगठन, कार्य और कर्तव्यों के ब्यौरे


पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड ((विद्युत मंत्रालय,भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत भारत सरकार का उपक्रम) की कल्पना की गई और यह वर्ष 1986 में अस्तित्व में आया जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ भारतीय विद्युत क्षेत्र को फंड आधारित और गैर फंड आधारित वर्ग की सहायता प्रदान करना था।

संगठन

कॉर्पोरेशन निदेशक मंडल द्वारा चलाया जाता है जो उच्चतम निर्णय लेने वाला निकाय है। यह पूर्णकालिक निदेशकों और कर्मचारियों के पदानुक्रम में कार्य करता है। पूर्णकालिक अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक और निदेशकों सहित प्रबंधकीय पद पर कार्यरत कर्मचारियों की संख्या 391 है जबकि गैर प्रबंधकीय वर्ग की संख्या 111 है और इस प्रकार कुल संख्या 502 है। संगठन ढांचाअनुबंध- क (1 MB) में संलग्न है।

उदेश्य व कार्य

इसके ग्राहकों के संबंध में कॉर्पोरेशन के उद्देश्य व कार्यों में निम्नलिखित क्षेत्रों में कई सेवाओं व उत्पादों को मुहैया कराना शामिल है:-

  • वित्तीय व फंड आधारित सेवाएं
  • संस्थागत विकास सेवाएं और
  • अन्य में शामिल हैं शुल्क आधारित परामर्श सेवाएं


इनके ब्यौरे अनुबंध –ख में संलग्न हैं।

इसके अधिकारियों व कर्मचारियों के अधिकार व कर्तव्य

पर्याप्त संस्थागत व्यवस्थाएं मौजूद हैं ताकि कॉर्पोरेशन के अधिकारी व कर्मचारी अपनी ड्यूटियां संतोषजनक ढंग से पूरा करने के साथ-साथ विभिन्न मुवक्किलों,ग्राहकों व कारोबार सहयोगियों के साथ कार्य कर सकें। शक्तियों का प्रत्यायोजन दस्तावेज़ के माध्यम से सशक्तिकरण की योजना इस बात को सुनिश्चित करती है कि कारोबार के निपटान और मुवक्किलों और ग्राहकों की सेवा से संबंधित विभिन्न मुद्दे समुचित तेज़ी से निपटाए जाएं ताकि गुणवत्ता सेवा सुनिश्चित हो। शक्तियों का प्रत्यायोजन दस्तावेज़ व्यापक रूप से ऊपर से नीचे की ओर जाता है जिसमें निदेशक मंडल निर्णय लेने का उच्चतम निकाय होने के नाते कारोबारी निर्णयों का निपटान करता है और उपयुक्त व त्वरित निर्णय लेने के लिए यही शक्तियां अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक,निदेशकों और उससे नीचे प्रत्यायोजित की गई हैं।

इसके द्वारा रखे गए अथवा इसके नियंत्रण में अथवा इसके कर्मचारियों द्वारा अपने कार्यों का निर्वाह करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले नियम, विनियम, अनुदेश ,नियम पुस्तिकाएं और रिकार्ड

व्यापक रूप से निम्नलिखित नियम पुस्तिकाएं, नियम, विनियम, अनुदेश,रिकार्ड आदि कॉर्पोरेशन के पास हैं और इनका पालन कर्मचारियों द्वारा विभिन्न कार्यों व दायित्वों के निर्वाह के दौरान किया जाता है।

  • संस्था के अंतर्नियम व संस्था के ज्ञापन
  • कारोबार व कार्य करने के लिए विकसित नियम पुस्तिकाएं (i) मानव संसाधन नियम पुस्तिका, (ii) अधिप्राप्ति नियम पुस्तिका, (iii) सतर्कता नियम पुस्तिका, (iv) संसाधन जुटाव नियम पुस्तिका(घरेलू व अंतर राष्ट्रीय, (v) सेवाई नियम पुस्तिका(घरेलू व अंतर राष्ट्रीय), (vi) निवेश नियम पुस्तिका, (vii) जोखिम प्रबंधन नीति आदि।
  • समय – समय पर जारी राष्ट्रपति के विभिन्न निदेश जैसे समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमज़ोर वर्गों जैसे अनु.जा./अनु.ज.जा./अ.पि.व./शारीरिक रूप से विकलांग आदि को आरक्षण व रियायतें और वेतन संशोधन और नीतियों आदि के संदर्भ में भी।
  • प्रचालनात्मक नीति संबंधी वक्तव्य(कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित),अनुदानों व रियायतों अथवा ब्याज मुक्त ऋणों आदि के संबंध में नीतियां,मानक ऋण दस्तावेज़,द्विपक्षीय/बहुपक्षीय करार आदि।
  • भारत सरकार द्वारा जारी विभिन्न मार्गनिर्देश जैसे, वितरण सुधार, उन्नयन और प्रबंधन(डीआरयूएम),त्वरित विद्युत विकास और सुधार कार्यक्रम(एजीऐंडएसपी),विभिन्न वित्तीय वर्षों से विद्युत मंत्रालय के प्रतिनिधित्व में भारत सरकार और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन के बीच समझौता ज्ञापन की शर्तें,अन्य संगठनों जैसे प्रशिक्षण संस्थानों आदि के साथ समझौता ज्ञापनों में शामिल होना।
  • लागू कानूनों के अनिवार्य उपबंध कंपनी अधिनियम 1956,आयकर अधिनियम 1961,सेबी मार्गनिर्देश और अन्य संबद्ध अधिनियम।
  • सेवा शर्तों और कर्मचारियों के विभिन्न वर्गों को उपलब्ध लाभ आदि के मामले में सरकारी उद्यम विभाग द्वारा विभिन्न मार्गनिर्देश कर प्रवर्तन प्राधिकरण जैसे केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड,नियंत्रक व महालेखा,वित्त मंत्रालय आदि द्वारा जारी अनुदेश,मार्गनिर्देश,परिपत्र।
  • निदेशक मंडल द्वारा यथा विकसित और अनुमोदित अधिकारों का प्रत्यायोजन योजना
  • कारोबार आदि के निपटान के मामले में कॉर्पोरेशन द्वारा विभिन्न परिपत्र,अनुदेश।

इसके कार्यों के निर्वाह के लिए इसके द्वारा तय किए गए मानक

कॉर्पोरेशन के कार्यों को इस उद्देश्य के लिए तय किए गए विभिन्न मानकों,नियमों,और मार्गनिर्देशों के माध्यम से कुशल और कारगर ढंग से करने की माग की जाती है जैसे –

  • कारोबारी नीतिशास्त्र का पालन,
  • सर्वोत्तम के प्रति जोश और परिवर्तन के लिए उमंग,
  • ग्राहक अपेक्षाओं पर फोकस,
  • प्रतिबद्धताओं का कड़ाई से पालन,
  • कॉर्पोरेशन के विवेकपूर्ण मानकों का पालन,
  • राष्ट्रीय योजनाओं और प्राथमिकताओं के साथ संगति,वित्तीय और तकनीकी आर्थिक व्यवहार्यता और आवश्यक व उपयुक्त अनुमतियों के लिए
  • सभी मामलों में सत्यनिष्ठा व निष्पक्षता.
  • मनुष्यों की गरिमा व योग्यता का आदर,
  • अनुक्रिया की तीव्रता सुनिश्चित करना,
  • शिक्षा प्राप्ति,रचनात्मकता और टीम वर्क को बढ़ावा देना।
  • सामान्यतः ये मानक कारोबार और दायित्व को कुशल व तीव्र ढंग से करने की ज़रूरत को रेखांकित करता है जिसमें कॉर्पोरेशन के विभिन्न कार्यों में जैसे घरेलू और व बहुपक्षीय तथा विदेशी उधारियों कराधानों,मूल्यांकनों,वसूली,ग्राहकों और कर्मचारियों व स्टेकहोल्डरों के साथ भुगतान लेन-देन में वित्तीय औचित्य के सिद्धांतों,किफ़ायत,मितव्ययिता,खरे व्यवहार,पारदर्शिता,नैसर्गिक न्याय आदि का उचित ढंग से पालन किया जाता है।

किसी व्यवस्था के ब्यौरे जो इसकी नीति के गठन अथवा इसके कार्यान्वयन के संबंध में परामर्श अथवा जनता के सदस्यों द्वारा प्रतिनिधित्व के लिए मौजूद हैं

कॉर्पोरेशन ने विस्तृत सिटीज़न चार्टर प्रकाशित किया है जिसमें इसकी नीति के गठन अथवा इसके कार्यान्वयन और शिकायत निपटान के लिए योजना,यदि कोई हो, के संबंध में परामर्श अथवा जनता के सदस्यों द्वारा प्रतिनिधित्व के लिए व्यापक तंत्र की व्यवस्था है। सिटीज़न चार्टर की एक प्रति संलग्न है और अनुबंध–ग (1006 KB) के तौर पर मार्क की गई है।
 

दस्तावेज़ों की श्रेणियों का विवरण जो इसके पास अथवा इसके नियंत्रणाधीन है

दस्तावेज़ों को गोपनीय(जिसे जनता को उपलब्ध नहीं कराया जा सकता)और सामान्य के संदर्भ में वर्गीकृत भी किया जा सकता है।
कॉर्पोरेशन के पास रखे दस्तावेज़ सामान्यतया संबंधित व ज़िम्मेदार अधिकारी द्वारा कॉर्पोरेशन के भीतर संदर्भ के लिए हैं।

निम्नलिखित दस्तावेज़ हैं जो इसके प्रचालनों के कारगर व कुशल कार्य के लिए विभाग के पास हैं :

  • संस्था के अंतर्नियम व संस्था के ज्ञापन
  • कारोबार व कार्य के लिए विकसित नियम पुस्तिकाएं
  • मानव संसाधन नियम पुस्तिका
  • सेवाई नियम पुस्तिका(घरेलू व अंतर राष्ट्रीय)
  • अधिप्राप्ति नियम पुस्तिका
  • सतर्कता नियम पुस्तिका
  • संसाधन जुटाव नियम पुस्तिका(घरेलू व अंतर राष्ट्रीय)
  • निवेश नियम पुस्तिका
  • जोखिम प्रबंधन नीति आदि

प्रचालनात्मक नीति विवरण

गोपनीय दस्ताणवेज जो अघिनियाम के खण्डष 8 के अंतर्गत प्रकटन से छूट प्राप्तढ हैं इस प्रकार हैं :

  • बोर्ड बैठकों व सामान्यी बैठकों का कार्यवृत्त
  • अंतरा विभागीय व अंतर विभागीय दस्ताोवेजों में निहित कॉपोरेशन की विचारात्म क प्रक्रियाओं के उददेश्यत के लिए कानूनी सलाह, राय ओर सिफारिशें
  • कर्मचारियों के निष्पाकदन मूल्यां कन से संबंधित गोपनीय रिपोर्टें ।
  • वाणिज्यिक गोपनीयता, व्या्पार गोपनीयता अथवा बौद्धिक संपत्ति सहित जानकारी, जिसके प्रकटन से तृतीय पक्ष की प्रतिस्पीर्धि स्थिति को नुकसान हो
  • प्रवर्तन उददेश्योंस के लिए अनुसंधानात्मिक रिकाडों का अनुपालन किंतु उस सीमा तक जिसके प्रकटन से निम्नोलिखित किसी विनिर्दिष्टम हित का नुकसान हो :-
    • प्रवर्तन कार्यवाहियां
    • निष्प्क्ष जांच अथवा निष्पिक्ष निर्णय
    • निजी गोपनीयता
    • जांच स्रोतों की गोपनीयता
    • कानून प्रवर्तन कार्मिकों की तकनीकें, कार्यविधि एवं सुरक्षा
  • किसी व्यनक्ति को उसकी न्यानसीय स्थिति में उपलब्धव जानकारी
  • विदेश सरकार से गुप्ति रूप से प्राप्तय जानकारी
  • जानकारी, जिसके प्रकटन से किसी व्ययक्ति के जीवन अथवा शारीरिक सुरक्षा को खतरा हो अथवा कानून प्रवर्तन अथवा सुरक्षा उद्देश्योंक के लिए विश्वारस में दी गई जानकारी अथवा सहायता के स्रोत का पता लगाना ।
  • ऐसी सूचना जो किसी की व्य क्तिगत जानकारी से संबंधित है जिसके प्रकटन का सार्वजनिक गतिविधि अथवा हित से कोई संबंध नहीं है अथवा जो संबंधित व्यकक्ति की निजता में अकारण दखल दे ।
  • जानकारी जो विशेष रूप संविधि द्वारा प्रकटन से छूट प्राप्त हो ।
  • जानकारी जिसके प्रकटन से भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य। की सुरक्षा, वैज्ञानिक अथवा आर्थिक हित, अंतर्राष्ट़्रीय संबंधों पर प्रतिकूल रूप से प्रभाव पड़ता हो अथवा जो किसी अपराध के लिए उकसाए ।
  • जानकारी जिसे स्पवष्टप रूप से किसी न्या्यालय अथवा ट्रिब्यूतनल द्वारा प्रकाशित करने की मनाही हो अथवा जिसके प्रकटन से न्याेयालय की अवमानना होती हो ।
  • जानकारी जिसके प्रकटन से संसद के विशेषाधिकार अथवा राज्यन विधायिका का उल्लंजघन होता हो ।
  • कोई अन्यल दस्ता वेज़ जिसे प्रबंधन अपने एकमात्र स्वध निर्णय से गोपनीय रखना चाहता है ।

इसके हिस्सेत के तौर पर अथवा इसकी सलाह के उद्देश्य से गठित की गई दो अथवा इससे अधिक व्य क्तियों द्वारा निर्मित बोर्डों, परिषदों, समितियों, अथवा निकायों का विवरण और क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जो जनता के लिए खुली हैं अथवा ऐसी बैठकों का कार्यवृत्तय जनता की पहुंच में है

विभिन्नक उद्देश्यों के लिए बनाए गए दो अथवा इससे अधिक व्यनक्तियों द्वारा निर्मित विभिन्नद बोर्डों, परिषदों, समितियों, अथवा निकायों के ब्यौनरे संलग्न हैं जिन्हें अनुबंध – घ (113 KB). के तौर पर निर्दिष्ट किया गया है । यह पुष्टि की जाती है कि इन बोर्डों,समितियों, और निकायों की बैठकें आतरिक निर्णय लेने के लिए हैं और यह सामान्यतः जनता के लिए नहीं खुली हैं और इन बैठकों का कार्यवृत्त जनता की पहुँच में नहीं है।

बोर्डों के अलावा, उपर उल्लिखित स्थायी समितियां, कुछ समितियां विशिष्ट उद्देश्य और सिफारिशों के लिए गठित की जाती हैं और उसके बाद बंद हो जाती हैं। उदाहरण के लिेए, कर्मचारियों की पदोन्नति, कर्मचारियों के चयन की सिफारिश के लिए गठित समितियां बोर्ड मुद्दों के संदर्भ में विशिष्ट सलाह देती हैं।

जन सूचना अधिकारी का नाम, पदनाम और अन्य ब्यौरे

नाम पदनाम पता टेलीफोन नं. फैक्स नं. ई-मेल
एच.के.दास उप महाप्रबंधक (इकाई मूल्यांकन) पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, ऊर्जानिधि , 1, बाराखंबा लेन , क्नाट प्लेस , नई दिल्ली-110001 011-23456000 (O) +91-11-23412545 mb@pfcindia.com

जन सूचना अधिकारी का दायित्व सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड से संबंधित जानकारी के लिए अनुरोध करने वाले व्यक्तियों को सूचना मुहैया करवाना है।

अपीलीय प्राधिकारी

नाम पदनाम पता टेलीफोन नं. फैक्स नं. ई-मेल
पी.के.सिंह ईडी पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, ऊर्जानिधि , 1, बाराखंबा लेन , क्नाट प्लेस , नई दिल्ली-110001 +91-11-23456588 (O) +91-11-23456588 pk_singh@pfcindia.com

अपीलीय प्राधिकारी का गठन जन सूचना अधिकारी के खिलाफ अपील ग्रहण करना है।

पर्यवेक्षण चैनलों और जवाबदेही सहित निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनाई जाने वाली कार्यविधि कंपनी का समग्र प्रबंध कंपनी के निदेशक मंडल के पास है। कंपनी के भीतर उच्चतम निर्णय लेने वाला निकाय निदेशक मंडल है।

कंपनी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अनुसार कंपनी की आम बैठक में कुछ मामलों में शेयरधारकों की अनुमोदन की आवश्यकता होती है।

निदेशक मंडल,जो कंपनी का अंतिम प्राधिकारी है, कंपनी के शेयरधारकों के प्रति जवाबदेह होते हैं। पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन सरकारी क्षेत्र का उद्यम होने के नाते कंपनी का निदेशक मंडल भारत सरकार के प्रति जवाबदेह भी है।

कंपनी का दिन प्रतिदिन का प्रबंधन कंपनी अध्यक्ष के अध्यक्ष और कार्यात्मक निदेशकों और अन्य अधिकारियों के पास है। निदेशक मंडल ने शक्तियों का प्रत्यायोजन के माध्यम से कंपनी के अध्यक्ष, कार्यात्मक निदेशकों और कार्यपालकों को शक्तियां प्रत्यायोजित की हैं। अध्यक्ष, कार्यात्मक निदेशक और अन्य अधिकारी शक्तियों का प्रत्यायोजन के अनुसार अपने निर्णय लेने के अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं।

शक्तियों का प्रत्यायोजन दस्तावेज़ व्यापक रूप से ऊपर से नीचे की ओर जाता है जिसमें निदेशक मंडल निर्णय लेने का उच्चतम निकाय होने के नाते कारोबारी निर्णयों का निपटान करता है और उपयुक्त व त्वरित निर्णय लेने के लिए यही शक्तियां अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक,निदेशकों और उससे नीचे प्रत्यायोजित की गई हैं।
 

इसके अधिकारियों व कर्मचारियों की निर्देशिका

अधिकारियों व कर्मचारियों की इनके नाम व पदनाम के साथ निर्देशिका संलग्न करकेअनुबंध-ङ (156 KB)के तौर पर निर्दिष्ट की गई है।
इसके अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा नकद में प्राप्त किए जा रहे मासिक पारिश्रमिक जिसमें इसके नियमों में दिए गए अनुसार मुआवज़े की प्रणाली शामिल है।

कॉर्पोरेशन द्वारा इसकी स्थायी नियमावली में नियुक्त कर्मचारी व अधिकारी मासिक आधार पर पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं। पारिश्रमिक की कुछ श्रेणियां हैं किंतु जिन्हें वार्षिक आधार पर प्रकट करके निपटाया जाता है। यद्यपि अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक में मूल वेतन, महंगाई भत्ता जैसे घटक शामिल होते हैं,किंतु वार्षिक आधार पर प्रकट करके निपटाए गए पारिश्रमिक में कर्मचारी प्रोत्साहन योजना आदि के सदर्भ में कॉर्पोरेशन के सामूहिक निष्पादन के आधार पर परिवर्ती मुआवज़ा शामिल है। अधिकारियों की विभ्न्न श्रेणियों द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक का विस्तृत ढांचा अनुबंध – च (973 KB)के तौर पर निर्दिष्ट है

इसमें प्रस्तुत किए गए ब्यौरे अलग हो सकते हैं जो उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों में परिवर्तनों/संशोधनों के स्वरूप और आवृत्ति पर आधारित है।

सभी योजनाओं के ब्यौरे, प्रस्तावित खर्च और किए संवितरण पर रिपोर्ट निर्दिष्ट करते हुए प्रत्येक एजेंसी को आबंटित बजट

पीएफसी प्रत्येक वर्ष राजस्व बजट तैयार करता है। पीएफसी द्वारा किया गया खर्च इन बजटों द्वारा नियंत्रित होता है। राजस्व शीर्ष के अंतर्गत कुल बजट अनुमान (बअ) में वर्ष 2016-17 के लिए कार्मिक, प्रशासन इश्यू खर्च आदि 41,910 लाख रु. है। निम्नलिखित मूल खर्च शीर्ष हैं:-

खर्च शीर्ष राशि (लाख रु. में )
कार्मिक खर्च (वेतन , भत्ते , पट्टा , पीएफसी आदि) 13,040
प्रशासन खर्च 3,095
विज्ञापन व प्रचार 900
यात्रा व वाहन 1,095
सी एस आर, अनुदान एवं दान 19,625
पूँजीगत खर्च 1,455
स्टाफ पेशगियां 2,700
संपूर्ण 41,910

 

आर्थिक सहायता कार्यक्रमों के निष्पादन का ढंग जिसमें आबंटित राशि और ऐसे कार्यक्रमों में लाभभोगियों के ब्यौरे शामिल हैं

भारत सरकार विभिन्न राज्य/केन्द्रीय विद्युत उपयोगिताओं द्वारा अपनी पहचान की गई प्राथमिकता परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए ऋणों पर ब्याज का बोझ कम करने के लिए अपने त्वरित जनन आपूर्ति कार्यक्रम (एजीऐंडएसपी)के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्रदान करती है। एजीऐंडएसपी योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता नौवीं पंचवर्षीय योजना से प्रदान की जा रही है और वर्तमान दसवीं पंचवर्षीय योजना में जारी रखी गई है। इस प्रकार ब्याज को कम करने के लिए मुहैया कराई गई आर्थिक सहायता अधिकतम3%है (जिसमें देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में रहने वाले के संबंध में 1%के अतिरिक्त प्रतिफल के साथ)जिसे पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन द्वारा चार्ज की गई प्रभावी लैंडिंग दर और बैंचमार्क दर (उस वित्तीय वर्ष के लिए 12 वर्ष की सरकारी प्रतिभूति पर ब्याज दर) के अंतर तक सीमित किया गया है। जो आर्थिक सहायता पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन के माध्यम से दी जा रही है उसे विभिन्न लाभभोगियों अर्थात राज्य/केन्द्रीय विद्युत क्षेत्र उपयोगिताओं को दिया जा रहा है।

इसके द्वारा मंज़ूर की जा रही रियायतें, परमिट अथवा प्राधिकार को प्राप्त करने वालों के ब्यौरे, उपर्युक्त आर्थिक सहायता (रियायत) प्राप्त करने वालों में केन्द्रीय/राज्य की विद्युत क्षेत्र उपयोगिताएं जो इस उद्देश्य के लिए पात्र हैं, शामिल हैं।

विभिन्न राज्य/केन्द्रीय विद्युत उपयोगिताओं द्वारा अपनी पहचान की गई प्राथमिकता परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए ऋणों पर ब्याज का बोझ कम करने के लिए अपने त्वरित जनन आपूर्ति कार्यक्रम (एजीऐंडएसपी)के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा दी गई आर्थिक सहायता के प्राप्तकर्ता में केन्द्रीय/राज्य विद्युत क्षेत्र उपयोगिताएं, जो इस उद्देश्य के लिए पात्र हैं, शामिल हैं।

इसके अलावा पीएफसी पात्र अध्ययनों के लिए एसईआरसीज़ सहित राज्य क्षेत्र की उपयोगिताओं को वित्तीय वर्ष में निवल लाभ के 0.4% तक अनुदान मुहैटा करवाता है जो विद्युत क्षेत्र के सुधार/ आर्थिक विकास में सहायता करता है। अनुदान के लिए अधिकतम संवितरण सीमा प्रति वर्ष प्रति राज्य 1 करोड़ रु. है।

सके पास उपलब्ध, इलेक्ट्रॉनिक रूप में परिवर्तित सूचना के संबंध में ब्यौरे

  • संगठन से संबंधित सूचना
  • शेयरधारकों और निदेशकों की सूची
  • कंपनी द्वारा पेश किए जा रहे उत्पादों और सेवाओं के ब्यौरे
  • इसके अधिकारियों की सूची व पते
  • संगठनात्मक ढांचा
  • वार्षिक रिपोर्टें
  • संगठन के विभिन्न कार्यालयों/विभागों की भूमिका व दायित्व
  • कर्मचारियों की निर्देशिका
  • उन ऋण लेने वालों की सूची जिन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की गई है
  • वित्त पोषित योजनाएं एवं उनके ब्यौरे
  • कंपनी द्वारा की गई उधारियां व उनके ब्यौरे
  • टेंडर नोटिस व टेंडर दस्तावेज़

जानकारी प्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं के ब्यौरे जिसमें पुस्तकालय अथवा रीडिंग रूम ,यदि सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए रखा गया है, के कार्य घंटे शामिल हैं

नागरिक संगठन के बारे में और इसके विभिन्न उत्पाद व सेवाओं आदि के बारे में निम्नलिखित के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं –

  • कॉर्पोरेशन की वैबसाइट अर्थात www.pfcindia.com
  • ऊर्जानिधि', 1, बाराखंबा लेन, क्नाट प्लेस , नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेशन के कार्यालय के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित रिसेप्शन पर 'क्या मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ' काउंटर पर पहुँच कर ।
  • इसके अलावा, कॉर्पोरेशन अपने प्रचालनगत परिणाम प्रत्येक तिमाही/वर्ष अग्रणी समाचार पत्रों में प्रकाशित करती है जिन तक पहुँचा जा सकता है।
  • कॉर्पोरेशन के निष्पादन आदि के ब्यौरे 'ऊर्जानिधि', 1, बाराखंबा लेन, क्नाट प्लेस , नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट संचार और जन संपर्क यूनिट में भी उपलब्ध हैं।
  • ऊपर बताए गए अनुसार कॉर्पोरेशन द्वारा प्रकाशित सिटीज़न चार्टर में भी प्रत्येक यूनिट के संबंध में उनके डाक पते, टेलीफोन संपर्क नं. और ईमेल आईडी के साथ संपर्क बिंदु/पब्लिक इंटरफेस की सूची तैयार करता है जिसे संबंधित कार्यक्षेत्र और कारोबार के संबंध में प्राप्त किया जा सकता है।
  • कॉर्पोरेशन द्वारा रखे गए पुस्तकालय अथवा सूचना केन्द्र सामान्य तोर पर इसके कर्मचारियों को उपलब्ध हैं और ये जनता के इस्तेमाल के लिए नहीं हैं।

टिप्पणी: संगठनात्मक ढांचे में कोई परिवर्तन होने की स्थिति अथवा परिस्थितियों में परिवर्तन होने के कारण फंक्शनिंग के आवश्ययक होने पर उपर्युक्त जानकारी परिवर्तित/संशोधित की जा सकती है।